डोब कुंड

श्योपुर से 55 किलोमीटर दूर गोरस श्योपुर मार्ग पर स्थित डोब कुंड प्रोगेतिहासिक काल से वर्तमान काल तक की कई सभ्यताओं का साक्षी रहा है दो प्राकृतिक पानी के कुंड जिनके किनारे 8 से 10 हजार वर्ष पूर्व आदि मानव के प्राचीन आवास शैलाश्रय हैं उनके द्वारा बनाये गए शैल चित्र हैं | 9वी व 10वी शताब्दी मैं डोब कच्प्घात राजाओ की राजधानी रहा है | संवत 1045 मे विक्रम सिंह कच्छापघात द्वारा बनाए गए जैन मंदिर हरगौरी मंदिर तथा अन्य मंदिरों के भाग्नावशेषो के अतिरिक्त महाराजा मधौराव सिंधिया द्वारा पालतू शेरो को रखने के लिए बनाए गए विशाल पिंजरे के साथ साथ सघन वन और प्रकृति की अनमोल सम्पदा से संपन्न डोब कुंड दर्शनीय है